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एसएनसीयू (SNCU) रतलाम में गंभीर अवस्था में भर्ती 860 ग्राम की नवजात बालिका उपचार के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लोटी

 जिला चिकित्सालय रतलाम के मातृ एवं शिशु (MCH) यूनिट में स्थित एसएनसीयू (SNCU) रतलाम में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात बालिका उपचार के बाद स्वस्थ 

 रतलाम 30 जुलाई 2026

दीपिका पति अनिल निवासी सागरपाड़ा, आलोट, रतलाम का प्रसव समय पूर्व 25 सप्ताह में ही घर पर हो गया था। प्रसव उपरांत महिला एवं नवजात  को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से एमसीएच स्थित एसएनसीयू लाया गया। भर्ती के समय नवजात की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसे सांस लेने में कठिनाई, शॉक तथा अत्यधिक कम वजन की समस्या थी। भर्ती के तुरंत बाद चिकित्सकों एवं नर्सिंग अधिकारियों की टीम द्वारा पुनर्जीवन कर एसएनसीयू प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार प्रारंभ किया गया। समयपूर्व जन्म होने के कारण नवजात के फेफड़े पूर्ण विकसित नहीं थे, जिससे उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी।

सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह के मार्गदर्शन में प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक आर्या के नेतृत्व में एसएनसीयू (SNCU)के डॉक्टरों एवं नर्सिंग अधिकारियों की टीम ने फैसिलिटी बेस्ड नियोनेटल केयर गाइडलाइन के अनुसार उपचार शुरू किया।

भर्ती के बाद नवजात को 15 दिनों तक सीपैप (CPAP) मशीन से ऑक्सीजन दी गई। इसके बाद नेजल प्रॉन्स एवं ऑक्सीजन हुड के माध्यम से ऑक्सीजन प्रदाय की गई। भर्ती के कुछ दिनों बाद बच्चे का वजन  690 ग्राम रह गया था। प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार जारी रखा गया। इस दौरान बच्चे को बार-बार एपनिया (सांस रुकना) की समस्या हुई, जिसका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। आवश्यक जांच के बाद प्रीमैच्योरिटी एनीमिया होने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया।

स्थिति में सुधार होने पर लगभग 15 दिन बाद नली के माध्यम से कम मात्रा में मां का दूध देना शुरू किया गया तथा धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाई गई। माता को बच्चे की देखभाल के लिए प्रशिक्षित किया गया तथा प्रतिदिन कंगारू मदर केयर (केएमसी) कराई गई, जिससे उपचार में काफी सहायता मिली और बच्चे का वजन बढ़ना शुरू हुआ।

करीब 60 दिनों तक एसएनसीयू में उपचार के दौरान दीपिका ने प्रतिदिन अधिक से अधिक केएमसी की तथा नर्सिंग अधिकारियों की निगरानी में कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना शुरू किया गया। नवजात की आंखों की जांच भी कराई गई।

नवजात के पूरी तरह स्वस्थ होने, वजन में वृद्धि तथा माता द्वारा दूध पिलाने एवं देखभाल में सक्षम होने के बाद 28 जुलाई 2026 को 60 दिन बाद उसे डिस्चार्ज किया गया। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन लगभग 1400 ग्राम था।

बच्चे के परिजनों ने सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह, प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक आर्या, डॉ. राम कुमार तथा एसएनसीयू के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों एवं सफाई कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। नवजात के उपचार में डॉ. प्रतीक आर्या, डॉ. राम कुमार, नर्सिंग ऑफिसर इंचार्ज भारती गहलोत तथा नर्सिंग अधिकारियों अश्विथि, निशा, लाली, प्रीति, उमा, दीक्षा, राधा, निर्मलागुड्डी सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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