रतलाम, नगर परिषद धामनोद शासन, प्रशासन की मनमानी या लापरवाही
क्या CMO, स्टाफ अध्यक्ष को विश्वास में लिए बिना फाइलें दबा रहे ?

*धामनोद नगर परिषद में सत्ता के अंदर ही घमासान: भाजपा अध्यक्ष के सामने भी अधिकारियों की “एजेंडा” वाली ढाल*
डीजल खर्च और अतिक्रमण पर जानकारी मांगने पर 2 पार्षद पहुंचे कलेक्टर के पास, लगाया “जानकारी छुपाने” का आरोप*
रतलाम। धामनोद नगर परिषद में इन दिनों जनप्रतिनिधि बनाम अधिकारियों की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। हैरानी की बात ये है कि नगर परिषद में सत्तापक्ष भाजपा का अध्यक्ष होने के बावजूद, अधिकारियों द्वारा जानकारी न देने और आवेदनों को “एजेंडे में नहीं” कहकर टालने का मामला सामने आया है।
इससे 2 सवाल खड़े हो रहे हैं
क्या अधिकारी अध्यक्ष से भी कामकाज की जानकारी छुपा रहे हैं?
या अध्यक्ष का अधिकारियों पर नियंत्रण/कार्यक्षमता निष्क्रिय है?
क्या है पूरा घटनाक्रम
*1.डीजल खर्च पर सवाल = 2 महीने की चुप्पी + “आवेदन गायब”*
वार्ड 11 के पार्षद मुकेश चौधरी ने 21/05/2026 को नगर परिषद में आवेदन देकर 2 जानकारी मांगी थी:
1.-नगर परिषद के पास कुल कितने वाहन हैं और कितने चालू/खराब हैं
2.-2024-25 और 2025-26 में वाहनों में कितना डीजल खर्च हुआ, माह-वार विवरण
आवेदन पर 22/05/2026 की कार्यालय प्राप्ति मुहर लगी है। पार्षद का कहना है कि डीजल व्यय में अनियमितता की आशंका के चलते उन्होंने जानकारी मांगी थी।
लेकिन 17/07/2026 को हुई सामान्य सभा में जब उन्होंने जवाब मांगा तो CMO पूजा गोयल ने पत्र क्रमांक `नप/1124/2026 दिनांक 17.07.2026 थमा दिया। इसमें लिखा था “उक्त प्रकरण बैठक के एजेंडे में सम्मिलित नहीं था, इसलिए जानकारी नहीं दी जा सकती ।
सबसे चौंकाने वाली बात तब हुई जब *सत्तापक्ष भाजपा की अध्यक्ष दुर्गा अजय डिंडोर ने भी बैठक में कहा “पार्षद का उक्त प्रश्न पत्र की मुझे जानकारी/ पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ है।
इससे नाराज होकर पार्षद ने 21/07/2026 को कलेक्टर को शिकायत दी। पत्र में लिखा “मेरे पास प्राप्ति मुहर लगा आवेदन मौजूद है। इससे स्पष्ट है कि मेरे आवेदन को जानबूझकर दबाया/गायब किया गया है” ।
1. पार्षद ने 3 मांग की: डीजल खर्च की जांच, दोषी पर FIR, और 7 दिन में जानकारी।
2. अतिक्रमण की जानकारी = वही पत्र, वही जवाब*
वार्ड 04 के पार्षद मदनलाल पाटीदार ने भी 01/06/2026 को धारा 223 के तहत आवेदन दिया। उन्होंने 01.01.2025 से 29.05.2026 तक अतिक्रमणकारियों को जारी नोटिस, हटाए गए अतिक्रमण और लंबित मामलों की डिटेल मांगी थी।
1.5 महीने बाद 17/07/2026 को उन्हें भी CMO का वही पत्र नप/1124/2026 मिला जिसमें बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं लिखा था।
बैठक में अध्यक्ष ने इस पर भी कहा “इस पत्र की जानकारी नहीं है I
पार्षद ने 21/07/2026 को कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा जनहित की जानकारी देना अधिकारी का वैधानिक दायित्व है। इसे एजेंडे से जोड़ना नियम विरुद्ध है। जानकारी छुपाने वालों पर कार्रवाई हो ।
सबसे बड़ा मुद्दा: अध्यक्ष को ही जानकारी नहीं
धामनोद नगर परिषद में अध्यक्ष पद पर भाजपा का कब्जा है। बावजूद इसके 2 अलग-अलग विषयों पर 2 अलग-अलग पार्षदों के आवेदन पर अध्यक्ष को जानकारी न होना कई सवाल खड़े करता है:
1.*अधिकारियों की मनमानी*:
2.*नियंत्रण का अभाव*: क्या अध्यक्ष कार्यालय के कामकाज पर निगरानी नहीं रख पा रही हैं?
3.*एजेंडा सिस्टम का दुरुपयोग*: क्या “एजेंडे में नहीं” को बहाना बनाकर असहज सवालों को टाला जा रहा है?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर सत्ता पक्ष के अध्यक्ष को ही फाइलों की जानकारी नहीं मिल रही, तो पार्षदों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
*पार्षदों का आरोप*: सार्वजनिक धन और जनहित के मुद्दों पर जानकारी मांगना हमारा अधिकार है। उसे दबाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने कहा कि
आवेदन गायब होने जैसी कोई बात नहीं है
संबंधित विषय नियमानुसार बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था,अध्यक्ष की अनुमति मिलने पर इसे आगामी बैठक के एजेंडे में शामिल कर जानकारी उपलब्ध करा देंगे
*अब आगे क्या*
दोनों पार्षदों की शिकायत के बाद अब कलेक्टर रतलाम से जांच और निर्देशों का इंतजार है। देखना होगा कि कलेक्टर इसे केवल “प्रक्रियागत खामी” मानते हैं या “जानकारी दबाने” के मामले में कार्रवाई करते हैं।

